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Tuesday, March 10, 2009

न्यूज़ नहीं, नौटंकी चैनल हैं (कहानी)

वो ठट्ठा मार कर हंस रहे थे और मैं शर्म से लथपथ ज़मीन में गड़ा जा रहा था, हर पल, निरंतर, लगातार... क्या कहूं, कैसे जवाब दूं, सब कुछ समझ से परे हो गया था। उन्होने कुछ इस अंदाज़ में कहा था कि मुझे लगा मेरे कानों में खौलता-पिघला सीसा उतार दिया गया हो. एक-एक शब्द नश्तर की मानिंद मेरी आत्मा को लहुलुहान करता जा रहा था. काश, ये ट्रेन पटरियों की बजाय मेरे सिर पर से गुज़र रही होती. वो 4 थे. पांचवीं सीट मेरी थी. और छठी सीट पर एक सांवली लेकिन बेइंतहा खूबसूरत...

पुरी कहानी मीडिया ख़बर.कॉम पर । लिंक : http://mediakhabar.com/topicdetails.aspx?mid=29&tid=781

Friday, February 13, 2009

आखिरी चेहरा - कहानी - हरीश चंद्र बर्णवाल



मिस्टर कुमार टेलीविजन के बड़े पत्रकार हैं। इनका मार्केट इन दिनों अप है... टेलीविजन की भाषा में बोलूं तो इनकी टीआरपी काफी ऊपर चल रही है। लेकिन मिस्टर कुमार को इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इन्हें अपना चेहरा कई बार बदलना पड़ता है। लेकिन इससे इन्हें कोई गुरेज नहीं। कहानी सुननी हो तो इनके चेहरे देखने जरूरी हैं । पुरी कहानी मीडिया ख़बर.कॉम पर पढ़ें। http://mediakhabar.com/topicdetails.aspx?mid=29&tid=681