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Tuesday, May 5, 2009
समाचार-पत्रों में बढ़ता भाषायी खेल
भूमंडलीकरण ने समाज में प्रत्येक चीज़ को बाज़ार में प्रवेश करा दिया है जहाँ सभी प्रतिस्पर्धा की होड़ में लगे हुए हैं। समाचार-पत्र भी बाज़ार में प्रवेश कर चुके हैं। यही कारण है कि सभी समाचार-पत्र, बाज़ार में अपना ऊँचा स्थान बनाने के लिए भाषायी खेल का सहारा ले रहे हैं। तथा समाचार-पत्रों की भाषा के वास्तविक स्वरूप को अनदेखा कर एक नई भाषा गढ़ रहे हैं जो सही मायने में समाचार-पत्रों की भाषा न होकर बाज़ार की चकाचौंध भरी जिंदगी में जीने का एक मंत्र है। आगे मीडिया ख़बर.कॉम पर।
लिंक : http://mediakhabar.com/topicdetails.aspx?mid=89&tid=974
Thursday, February 26, 2009
चैनल के लोग भी ज़िम्मेदारी से अपना काम करते हैं
- सुप्रिया प्रसाद, न्यूज़ डायरेक्टर, न्यूज़-24
मुंबई में हुई आतंकवादी गतिविधि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और इसे कवर करना न्यूज़ चैनलों के लिए बहुत ही अधिक चुनौतीपूर्ण था और न्यूज़ चैनलों ने पूरी ज़िम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका को निभाया। इसमें कोई कोताही नहीं बरती और पत्रकारों ने अपनी जान की परवाह किए बिना इस पुरी घटना की जानकारी लोगों तक पहुंचाई। लेकिन इसको लेकर जो आलोचनाएँ हो रही हैं वह बेतुकी है. बेमतलब है और उसमें दम नही हैं.आजकल टेलीविजन न्यूज़ चैनलों की आलोचना... पूरा लेख मीडिया ख़बर.कॉम पर पढ़ें। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। http://mediakhabar.com/topicdetails.aspx?mid=34&tid=749
Friday, February 20, 2009
चक्रव्यूह में फंस रहा है देश का पत्रकार
Friday, February 13, 2009
आखिरी चेहरा - कहानी - हरीश चंद्र बर्णवाल

मिस्टर कुमार टेलीविजन के बड़े पत्रकार हैं। इनका मार्केट इन दिनों अप है... टेलीविजन की भाषा में बोलूं तो इनकी टीआरपी काफी ऊपर चल रही है। लेकिन मिस्टर कुमार को इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इन्हें अपना चेहरा कई बार बदलना पड़ता है। लेकिन इससे इन्हें कोई गुरेज नहीं। कहानी सुननी हो तो इनके चेहरे देखने जरूरी हैं । पुरी कहानी मीडिया ख़बर.कॉम पर पढ़ें। http://mediakhabar.com/topicdetails.aspx?mid=29&tid=681
Thursday, February 12, 2009
ब्रेक करते ब्रेकिंग न्यूज़

ब्रेक करते ब्रेकिंग न्यूज़ / बेलगाम ब्रेकिंग न्यूज़
हिन्दी के खबरिया चैनलों पर आजकल ब्रेकिंग न्यूज को लेकर नई-नई परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं। कब कौन सी खबर किस चैनल के लिए ब्रेकिंग न्यूज हो जाए, यह कहना मुश्किल है। शुरुआती दौर में ब्रेकिंग न्यूज शब्द का इस्तेमाल न्यूज चैनलों में अति महत्वपूर्ण खबरों के लिए किया जाता था और ऐसी खबरें बहुत कम हुआ करती थी। पर, अब ब्रेकिंग न्यूज की संख्या हिन्दी के खबरिया चैनलों पर इतनी ज्यादा रहती है कि यह शब्द अपना मायने ही खोने लगा है। एक चैनल ने तो अपने कार्यक्रम का नाम ही ब्रेकिंग न्यूज रख दिया है --- आगे की खबर मीडिया खबर .कॉम पर पढ़ें। नीचें दिए गए लिंक पर क्लिक करें ।
Wednesday, February 11, 2009
Tuesday, February 10, 2009
कवर फायर

देश के लिए 26 नवम्बर 2008 एक ऐसा मनहूस और भयानक दिन साबित हुआ जिसने सारे देश को झकझोड़ कर रख दिया। आतंकवादी अपने मंसूबों में पुरी तरह से कामयाब तो नहीं हुए लेकिन मुंबई में अच्छी-खासी तबाही मचाने में कामयाब हो गए। आगे पढने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ।
http://mediakhabar.com/topicdetails.aspx?mid=35&tid=596




