Monday, May 9, 2011

पेशा नहीं ‘पैशन’ है पत्रकारिता

पेशा नहीं ‘पैशन’ है पत्रकारिता: "समयबद्ध तत्परता एवं सक्रियता पत्रकारिता के बीजगुण हैं. एक पत्रकार की स्थिति उस दोलक की तरह होती है जो तयशुदा अंतराल के बीच हर समय गतिशील रहता है. पत्रकार होने की पहली शर्त है कि आलसपन या सुस्ती से वह कोसो दूर रहे. उसकी निगाह ‘शार्पसूटर’ की भाँति मंजी हुई या पैनी होनी चाहिए. किसी घटना या घटनाक्रम को एक अच्छी ख़बर के रूप में ढाल लेने की काबिलियत होना एक दक्ष पत्रकार की प्राथमिक योग्यता है. पत्रकारीय पेशे में ‘न्यूज़ सेंस’ को छठी इन्द्रिय का जाग्रत होना कहा गया है.



समाचार-कक्ष में ख़बरों की आवाजाही हमेशा लगी रहती है. किसी ने ठीक ही कहा है कि जब सारी दुनिया सो रही होती है, तो समाचार-कक्ष में दुनिया भर के मसले जाग रहे होते हैं. यहाँ प्रत्येक ख़बर समय की खूंटी से बंधी हुई होती हैं. क्योंकि एक निर्धारित सीमा-रेखा(डेडलाइन) के बाद प्राप्त ख़बरें कटी-पतंग की तरह हवा में हिचकोलें खाती रह जाती हैं. चाहे वे कितनी भी महत्त्वपूर्ण, अप्रत्याशित, नवीन या बहुसंख्यक पाठकों की लोक-अभिरुचि की क्यों न हो? उन्हें अंततः ‘छपते-छपते’ कॉलम के अन्तर्गत ही संतोष करना पड़ता है या फिर अगले दिन की ‘प्रतीक्षा-सूची’ में जगह पाने के लिए होड़ करना होता है.

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