शैशवकाल की टीवी पत्रकारिता के ज़िद्दी नौनिहाल - चंदन प्रताप सिंह, राजनीतिक संपादक, टोटल टीवी : 26/02/09 देखते ही देखते साल 2008 भी बीत गया। इस एक बरस के दौरान टीवी पत्रकारिता ने बहुत कुछ होते देखा है। अब इन घटनाओं से टीवी के कई पत्रकारों को कितना अनुभव हासिल हुआ है, ये देखनेवाली बात है। अगर साल 2008 के टीवी पत्रकारिता का आंकलन करना चाहें तो मुंबई आतंकवादी घटना और दिल्ली सीरियल ब्लास्ट के बग़ैर अधूरी है। मुंबई आतंकवादी घटना को टीवी चैनलों ने युद्ध की तरह दिखाया। टीवी पत्रकारों के इस नए चेहरे को देखकर सरकार भी सकपका गई।... पुरी ख़बर मीडिया ख़बर पर । लिंक :
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